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डिजिटल युग में मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर आईजीयू मीरपुर में कार्यशाला आयोजित।

Published on: 10 Oct 2026

इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर के कुलपति प्रो. असीम मिगलानी के मार्गदर्शन एवं कुशल नेतृत्व में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मनोविज्ञान विभाग द्वारा महिला प्रकोष्ठ एवं महाराजा अग्रसेन चेयर के सहयोग से *“डिजिटल युग में मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना”* विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह ने की। हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट से डॉ. अतुल कुमार एवं डॉ. रुचिका यादव ने कार्यशाला में मुख्य संसाधन व्यक्तियों के रूप में शिरकत की। मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष एवं संज्ञानात्मक एवं व्यवहार विज्ञान संकाय की अधिष्ठाता डॉ. मंजू पुरी ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए सभी गणमान्य अतिथियों, संसाधन व्यक्तियों, प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों का स्वागत किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है, विशेषकर आज के तेज गति वाले डिजिटल युग में। उन्होंने कहा कि माननीय कुलपति के कुशल मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर विभिन्न अवसर उपलब्ध करवा रहा है, जिनका विद्यार्थियों को भरपूर लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे अपनी समस्याओं एवं चिंताओं को बिना किसी संकोच के अपने शिक्षकों के साथ साझा करें। उन्होंने खुलकर संवाद करने और समय पर उचित सहयोग प्राप्त करने के महत्व पर भी बल दिया।

कार्यशाला के दौरान डॉ. अतुल कुमार ने मोबाइल फोन एवं सोशल मीडिया के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बढ़ते प्रभाव की ओर विद्यार्थियों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने सत्र की शुरुआत विद्यार्थियों से अपने मोबाइल फोन बंद करने और डिजिटल व्यवधानों से दूर रहकर कार्यशाला में भाग लेने का आग्रह करते हुए की। उन्होंने बताया कि मोबाइल पर लगातार आने वाले नोटिफिकेशन और अत्यधिक स्क्रीन टाइम मस्तिष्क को निरंतर सतर्क अवस्था में रखते हैं, जिससे तनाव एवं बेचैनी बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल भौतिक सुख-सुविधाएं ही जीवन में वास्तविक खुशी और मानसिक शांति सुनिश्चित नहीं कर सकतीं।

डॉ. रुचिका यादव ने विद्यार्थियों को विभिन्न व्यावहारिक गतिविधियों में शामिल किया। दोनों संसाधन व्यक्तियों ने ध्यान एवं मेडिटेशन के अभ्यास करवाए, जिससे प्रतिभागियों को मानसिक शांति का अनुभव करने और आंतरिक संतुलन के महत्व को समझने का अवसर मिला। इस सत्र ने विद्यार्थियों को अपनी डिजिटल दिनचर्या से कुछ समय विराम लेकर अपने मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर महिला प्रकोष्ठ की संयोजक डॉ. रश्मि पुंडीर, डॉ. रोमिका बत्रा, डॉ. बिजेंद्र, डॉ. कविता, डॉ. बीरेंद्र, डॉ. अमनदीप, डॉ. अर्चना, डॉ. पूनम, डॉ. सतीश कुमार सहित विभिन्न विभागों के अध्यक्षों एवं अनेक प्राध्यापकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। 

कार्यशाला के माध्यम से यह महत्वपूर्ण संदेश दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल कोई विलासिता नहीं, बल्कि जीवन की एक अनिवार्य आवश्यकता है। विद्यार्थियों को स्वस्थ डिजिटल आदतें अपनाने, तनाव का प्रभावी प्रबंधन करने तथा आवश्यकता पड़ने पर उचित सहयोग प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। मनोविज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. संदीप द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। मंच संचालन सुश्री कनक एवं सुश्री पारुल यादव ने किया।